(आनंद पवार)राजधानी में कोरोना का संक्रमण लगातार खतरनाक रुप लेता जा रहा है। सरकार के रिकॉर्ड में भले ही मौत के आकड़े कम हो, लेकिन सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीज कोरोना के संक्रमण की भयावहता की हकीकत बया कर रहे हैं। अस्पताल के वार्ड में हालात यह है कि कोरोना के इलाज के लिए भर्ती मरीज 10 से 12 घंटे शव के साथ रहने को मजबूर हैं। यहां पर दोपहर में मौत होने पर शव को रात में उठाया जा रहा है।
इसकी पड़ताल करने पर पता चला कि अस्पताल की मोर्चरी में जगह नहीं है। ऐसे में शव को रखने के लिए जगह नहीं है। वहीं, मोर्चरी फुल होने का कारण शवों के अंतिम संस्कार में लग रहा समय है। इस मामले में अस्पताल के जिम्मेदारों का कहना है कि शव के अंतिम संस्कार करने के लिए चार शव ही एक दिन में लिए जा रहे थे। इसलिए मोर्चरी फूल हो गई थी। अब सब ठीक हो गया है।एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती एक मरीज ने बताया कि रविवार को उसके सामने बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। दोपहर में मौत होने के बावजूद उसको देर रात 2.30 बजे के करीब ले जाया गया। उसी बिस्तर पर एक अन्य कोरोना पॉजिटिव महिला को भर्ती किया गया, उसकी सोमवार देररात मौत हो गई, लेकिन सुबह तक उसे नहीं उठाया गया।
एलएनजेपी में एक दिन में 22 मौत
एलएलजेपी अस्पताल में ही औसतन 8 से 10 मौतें रोजाना हो रही हैं। सोमवार को एक दिन में ही अस्पताल में 22 मौतें हुई है। हालांकि इन मौतों के कोरोना से होने की पुष्टि डेथ ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही रिकॉर्ड में आएगी। बता दें सरकार ने 20 अप्रैल को तीन सदस्य डेथ ऑडिट कमेटी गठित की है। यह कमेटी कोरोना संक्रमित मृतकों के कारण का ऑडिट करती है। डेथ ऑडिट कमेटी अस्पताल से मरीज की केस सीट देखकर मौतें कोरोना से हुई या मौत का कोई दूसरा कारण यह तय करती है। अभी तक अस्पतालों से केस सीट नहीं मिलने से मौत का आंकड़ा नहीं बढ़ रहा था। सोमवार को अस्पताल में कोरोना के 676 मरीज भर्ती थे।
सोमवार को 18 शव अंतिम संस्कार को भेजे
अस्पताल से सोमवार के दिन 18 शव अंतिम संस्कार के लिए भेजे गए। इसमें 13 पंजाबी बाग श्मशान घाट और 5 निगम बोध श्मशान घाट भेजे गए। इसके अलावा एक मुस्लिम मृतक का भी शव कब्रिस्तान दफनाने के लिए भेजा गया। इसके अलावा शव को दूसरे अस्पताल की मोर्चरी में भी रखने के लिए भेजा जा रहा है। एक दिन पहले चार शव को रोहिणी स्थित अंबेडकर अस्पताल की मोर्चरी में भेजा गया।
बुजुर्ग और दूसरी बीमारी से पीड़ितों को खतरा
कोरोना के संक्रमण से सबसे ज्यादा बुजुर्ग और दूसरी बीमारी से पीड़ित लोगों को खतरा है। इनकी मृत्युदर भी स्वस्थ्य और कम आयु वर्ग के संक्रमितों से ज्यादा है। इसके चलते ही दिल्ली सरकार बुजुर्गों का पूरी दिल्ली में सर्वे भी करा रही है। जिससे की उनमें लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज की सुविधा उपलब्ध की जा सके। और रिकॉर्ड से बुजुर्गों की मॉनीटरिंग की जा सकें। इसकी शुरुआत सेंट्रल दिल्ली में शुरू हो गई है।
अब सबकुछ ठीक हो गया
^निगम बोध घाट पर एक दिन में चार ही शव को अंतिम संस्कार के लिए ले रहे थे। इसलिए मोर्चरी में शव रखने की जगह नहीं थी। कुछ समय के लिए दिक्कत आई थी। अब सबकुछ ठीक हो गया है।
- सुरेश कुमार, चिकित्सा निदेशक, एलएनजेपी
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