8 माह में सिर्फ 7 सेक्टर में पूल हुई 70 फीसदी जमीन

(आनंद पवार) राजधानी में सस्ते आवास उपलब्ध कराने लांच हुई दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की लैंडपूलिंग योजना किसानों और जमीन मालिकों को आकर्षित नहीं कर पा रही है। यहीं कारण है कि पॉलिसी में रजिस्ट्रेशन के लिए 18 महीने में तीन जोन एल, एन और पी-2 के सिर्फ 7 सेक्टर में ही 70 प्रतिशत जमीन पूल होने संबंधी आवेदन पोर्टल पर प्राप्त हुए है। हालांकि इस योजना के अभी जमीन पर उतरने में भी सबसे बड़ा रोड़ा कंसोर्टियम (संघ) बनाना है।

इसके लिए डीडीए जमीन मालिकों को राजस्व विभाग के जमीन के दस्तावेजों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया के बाद एक सेक्टर में 70 प्रतिशत जमीन मिलने पर नोटिस जारी करेगा। जिसमें भूमि पर विकास कार्य शुरू करने से पहले कानूनी तरीके से काम शुरू करने की योजना तैयार करनी होगी। एक सेक्टर के सभी आवेदकों को एक औपचारिक अनुबंध करना होगा।

इसमें अपने शेयर के साथ ही प्रावधानों जैसे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए फ्लैट बनाने की शर्त का पालन करना होगा। जानकार योजना में भू-स्वामियों के एक साथ आकर कंसोर्टियम बनाने को ही चुनौती बता रहे है। ऐसे में साफ है कि योजना पर जल्द काम शुरू होना अभी दूर की बात है।

राजस्व विभाग ने 371 आवेदन वेरिफाई किए

डीडीए ने योजना में आवेदन करने के लिए सभी गांव के लिए 5 फरवरी से 6 अक्टूबर 2019 के बीच विंडो खोली गई। इसमें 6071 आवेदन के साथ 6409 हेक्टेयर जमीन पंजीकृत हुई थी। इसके बाद दूसरी बार 13 गांव के लिए 3 जनवरी से 15 फरवरी 2020 तक दूसरी बार विंडो खोली गई। इसमें 71 आवेदन के साथ 78 हेक्टेयर जमीन पंजीकृत हुई। तीसरी बार सभी गांव के लिए 11 मार्च से 24 मार्च के बीच विंडो खोली गई। इसमें 77 आवेदन के साथ 94 हेक्टेयर जमीन पंजीकृत हुई। डीडीए को अब तक 6212 आवेदन के साथ 6575 हेक्टेयर जमीन पंजीकृत हुई। इनमें से राजस्व विभाग ने अब तक 1371 आवेदन की जमीन के दस्तावेजों की जांच पूरी कर ली है।

95 गांव की जमीन को 109 सेक्टर में बांटा

लैंड पूलिंग योजना में पांच जोन जे, के-1, एल, एन और पी-2 में आने वाले 95 गांव को शामिल किया गया है। इस जमीन को 109 सेक्टर मेंं बांटा गया है। एक सेक्टर में करीब 250 से 350 हेक्टयेर जमीन है। इसमें 80 हजार से 1 लाख तक लोग रह सकते है। कुल योजना में 20 हजार हेक्टयेर के करीब जमीन पूल होना है। अभी जोन के अनुसार पी-2 में 1283.6 हेक्टेयर, एन में 3313 हेक्टेयर, एल में 1742.6 हेक्टेयर, के-1 में 231.7 हेक्टेयर और जे में 3.6 हेक्टेयर जमीन पंजीकृत हो गई है।

यह है योजना: लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत किसान या भूस्वामी अपनी जमीन पर फ्लैट बना सकेंगे। उनको आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी फ्लैट बनाने की सुविधा देना होगा। यदि किसी सेक्टर में न्यूनतम 70% जमीन का पंजीकरण हो जाता है तो उस सेक्टर की 40%जमीन डीडीए बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने को ले लेगा। यहां पर स्कूल, पार्क, सड़क सहित अन्य सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।

इसमें से 60 प्रतिशत भूस्वामी को वापस कर दी जाएगी। जिस पर रेसिडेंसियल, कमर्शियल, सेमी रेसीडेंशियल और सेमी कमर्शियल फ्लैट का निर्माण होगा। इसके लिए योजना में 200 फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर ) तय किया गया है। हालांकि ईडब्ल्यूएस फ्लैट के लिए 15 प्रतिशत अलग से एफएआर की छूट मिलेगी।



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