शनिवार रात को गुड़गांव-सोहना-अलवर हाईवे पर निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड के एक हिस्से के गिरने के मामले में रविवार सुबह एनएचएआई के उच्चाधिकारी व निर्माण करने वाली कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। एनएचएआई के अधिकारियों कहा है कि इस मामले में हाई लेवल कमेटी द्वारा जांच कराई जाएगी। एनएचएआई के सदस्य सचिव आरके पांडेय, प्रोजेक्ट डायरेक्टर अशोक शर्मा समेत निर्माण करने वाली ओरिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एक्सपर्ट व उच्चाधिकारियों ने घटना स्थल का जायजा लिया। अधिकारी सुबह 11.30 बजे पहुंचे व करीब 2 घंटे तक घटनास्थल पर बारीकी से जांच करते रहे।
गुड़गांव-सोहना रोड हाइवे पर बन रहे एलिवेटिड फ्लाई ओवर पिलर नंबर 10 से 11 के बीच का एक सेग्मेंट की खिंचाई कम रहने के कारण हिस्सा गिर गया। एक सेग्मेंट फेल होने से पूरा स्पाइन नीचे गिर गया। ऐसा किन कारणों से हुआ, इस बारे में बारीकी से जांच की जाएगी। जांच के बाद जिम्मेदारी तय होगी। जांच शुरू होने के बाद ही मलबा हटाने का काम शुरू किया जाएगा। यह एनएचएआई के प्रोक्जेक्ट में हादसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले दिल्ली-जयपुर हाइवे के कई बार फ्लाई के हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इससे पहले रामपुरा फ्लाई ओवर व हीरो होंडा चौक फ्लाई ओवर के क्षतिग्रस्त होने के मामले में मुकदमा तक दर्ज करवाया गया है। लेकिन अभी तक कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ है।
सुबह 11 बजे तक घटनास्थल के चारों तरफ बेरिकेडिंग कर दी गई है। बेरिकेडिंग करने की वजह से रविवार सुबह सोहना रोड का वाटिका चौक से सुभाष चौक तक का ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया, जिससे वाहन चालकों को सेक्टरों में से होकर गुजरना पड़ा। इसके बाद 11.30 बजे एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अशोक शर्मा, एनएचएआई के सदस्य सचिव आरके पांडेय व निर्माण करने वाली कंपनियों के एक्सपर्ट पहुंच गए। उन्होंने गिरे हुए हिस्से को चारों तरफ से देखा और करीब दो घंटे तक यहीं रहे। करीब 1.30 बजे सभी अधिकारी मौका देखने के बाद लौट गए।
25 दिन पहले पिलर नंबर 10 से 11 के बीच में स्लैब डाला गया था
हाईवे पर सुभाष चौक से लेकर बादशाहपुर के आगे तक करीब साढ़े पांच किलोमीटर लंबा एलिवेटेड फ्लाई ओवर का निर्माण चल रहा है। पिछले साल फरवरी में इसका निर्माण शुरू किया गया है। ढाई साल में निर्माण कार्य पूरा होना है। अभी लगभग 50 फीसदी काम हो चुका है। पिलर बनाने के साथ ही स्लैब डालने का काम चल रहा है। 25 दिन पहले पिलर नंबर 10 से 11 के बीच में स्लैब डाला गया था। बताया जाता है कि बीच का एक सेग्नमेंट फेल होने से पूरा स्लैब ही शनिवार रात लगभग 10.30 बजे गिर गया। एक स्लैब की लंबाई लगभग 40 मीटर है। इसमें 15 सेग्मेंट लगाए गए हैं।
बारिश के दौरान हादसा होता तो जाती कई जानें
चार दिन पहले गुड़गांव में तेज बारिश हुई थी, यदि इस बारिश के दौरान इस तरह का हादसा हो जाता तो बहुत लोगों की जानें जा सकती थी। बारिश के दौरान जगह-जगह टू-व्हीलर सवार इस फ़्लाई ओवर के नीचे बारिश से बचाव के लिए खड़े होते हैं। ऐसे यह हादसा दर्दनाक हो सकता था।
कंकरीट की गुणवत्ता की भी जांच होगी
एनएचएआई के सदस्य सचिव आरके पांडेय ने कहा कि फ्लाईओवर के हिस्से के नीचे गिरने के पीछे की लापरवाही को लेकर जांच की जाएगी। इसकी स्ट्रंथ की जांच के अलावा कंकरीट की गुणवत्ता की भी जांच होगी। इसके बाद ही जिम्मेवारी तय की जा सकती है।
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