हफ्तेभर राशन नहीं मिला, फिर 1350 किमी. दिव्यांग मामा को लेकर चल दिया बिहार, तब आया राशन लेने का फोन

(भोला पांडेय)गुड़गांव से बीमार पिता को साइकिल से लेकर 1200 किलोमीटर की दूरी तय कर बिहार के दरभंगा जिले के अपने गांव पहुंची ज्योति कुमारी की तरह ही एक मामा-भांजे की भी दर्द भरी दास्तां है। प्रशासन से राशन न मिलने पर परेशान होकर भांजे ने पुरानी साइकिल खरीदी और अपने दिव्यांग मामा सतेंद्र को लेकर 1350 किलोमीटर की दूरी को 8 दिन में तय कर अपने गांव बिहार के गया जिला पहुंच गया। इस दौरान रास्ते में कई जगह उसे पुलिस के डंडे भी खाने पड़े। दो दिन तक भूखा भी रहना पड़ा। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। यह कहानी है गया जिले के गांव टोला थारी झारी निवासी 22 वर्षीय बबलू कुमार की।
बबलू बल्लभगढ़ स्थित रघुवीर कॉलोनी में किराए पर रहते हैं और यहीं पास में स्थित एक वर्कशॉप में नौकरी करते हैं। इनके दिव्यांग मामा सतेंद्र मलेरना रोड पर रहते हैं। मामा भी किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। लॉकडाउन लागू होने के बाद पैदा हुई परेशानी को दोनों करीब एक महीने तक झेलते रहे। गांव पहुंचकर दैनिक भास्कर से फोन पर अपनी आपबीती शेयर करते हुए बबलू कुमार ने बताया कि जब उनके सामने खाने का संकट पैदा हुआ तो उन्होंने प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर राशन की मांग की। लेकिन हफ्ताभर बाद भी जब राशन नहीं मिला तो मजबूर होकर वे घर के लिए निकल पड़े।

आठ दिन में तय की गांव की 1350 किलोमीटर की दूरी

बबलू ने बताया जब खाने का संकट पैदा हुआ तो वह अपने दिव्यांग मामा को साइकिल से लेकर गांव की ओर निकल पड़े। उन्होंने बताया उनके पास करीब ढाई-तीन हजार रुपए बचे थे। उसमें से गांव जाने के लिए दो हजार की पुरानी साइकिल खरीद ली। वह 24 अप्रैल को सुबह 4 बजे चले और 1 मई को गांव पहुंच गए। बबलू ने बताया वह एक दिन में करीब 170 किलोमीटर की दूरी तय करते थे। पुलिस की सख्ती से गांवों में घूमकर जाना पड़ा।
रास्ते में पुलिस के डंडे भी खाए और दो दिन भूखे भी रहे
बबलू ने बताया गांव तक का सफर तय करने के दौरान उन्हें कई जगह पुलिस के डंडे भी खाने पड़े। रास्ते में खाने के लिए कुछ पैसे साथ रखे थे। लेकिन लॉकडाउन के कारण जो सामान 10 रुपए में मिलता है उसे 20 रुपए देकर खरीदना पड़ा। रास्ते में पैसा खत्म हो जाने से 2 दिन भूखे ही चलना पड़ा। बबलू के अनुसार वह मामा काे लेकर पलवल, आगरा, कानपुर, इलाहाबाद, बनारस, सासाराम होते हुए गया पहुंचे। सड़क पर चलने के दौरान कोसीकलां, आगरा और इलाहाबाद में पुलिस वालों ने डंडे भी मारे। जब वह घर पहुंच गए तब फरीदाबाद प्रशासन से फोन आया कि तुम्हारा राशन तैयार है ले जाओ।

हालात सामान्य होने के बाद भी नहीं भूलेगा यह दर्द

बबलू कुमार का कहना है कि हालात सामान्य होने के बाद वह फिर आएंगे और पूरे जोश के साथ काम करेंगे। लेकिन लॉकडाउन ने जो दर्द दिया उसे वह जीवनभर नहीं भूलेंगे। उनका कहना है कि सरकार अमीरों के लिए हवाई जहाज तक उपलब्ध करा रही है। लोगांे को होटलों में एसी कमरों में मेहमान की तरह रख रही है लेकिन गरीबों के नसीब में सिर्फ परेशानियां और पुलिस के डंडे हैं। उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में सरकार और प्रशासन समय पर राशन तक उपलब्ध नहीं करा पाया।



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फरीदाबाद. साइकिल पर अपने दिव्यांग मामा को बैठाकर अपने गांव बिहार पहुंचा 22 वर्षीय युवक।


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